वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो भवन, भूखंड और वातावरण को दिशाओं व पंचतत्वों के संतुलन से व्यवस्थित करता है। इसका उद्देश्य जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लाना है।

वास्तु का आधार पाँच तत्व हैं: पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि। इनका संतुलन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रगति लाता है।
दिशा: दक्षिण-पश्चिम
गुण: स्थिरता, भार
स्थान: मास्टर बेडरूम/स्टोर
दिशा: उत्तर-पूर्व
गुण: शुद्धता, प्रवाह
स्थान: पूजा/जल स्रोत
दिशा: दक्षिण-पूर्व
गुण: ऊर्जा, परिवर्तन
स्थान: किचन
दिशा: उत्तर-पश्चिम
गुण: गतिशीलता, संचार
स्थान: गेस्ट/वेंटिलेशन
दिशा: केंद्र/ऊर्ध्व
गुण: विस्तार, शून्य
स्थान: आँगन/ओपन स्पेस
प्लॉट/फ़्लोर-प्लान, दिशाएँ और एक्सटेंशन का आकलन
संरचनात्मक परिवर्तन के बिना प्राथमिक सुधार
निवास/ऑफ़िस की आवश्यकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन
परिवर्तन के बाद ऊर्जा-प्रवाह का पुनर्मूल्यांकन